Tuesday, July 19, 2022

मैं और मोर तोर ,तह माया , जेहि बस कीन्हें ,जीव निकाया

 मैं और मोर तोर ,तह माया ,


जेहि बस कीन्हें ,जीव निकाया। 


ये मैं हूँ। ये मेरा है। ये तू है ये तेरा है ,बस ये ही माया है जिसने पूरे जीव संसार को अपने वश  में कर रखा है। ममत्व और अहंकार उस मार्ग की बाधाएं हैं जो भगवान की ओर जाता हैऔर उस परम तत्व परब्रह्म (स्वयं अपने सच्चिदानंद स्वरूप का )बोध कराता है। 

माया से ही पैदा होता है अहंकार और ममत्व। ममत्व यानी मन का ,मेरा ,ये मेरा  

है का भाव ,माया की  ही संतान है।  

Sunday, January 2, 2022

आशीर्वाद

सुखी रहे संसार जगत में दुखिया रहे न कोय ।
यह है अभिलाषा हम सब की भगवन पूरी होय।।
विद्या बुद्धि तेजबल सबके भीतर होय ।
दूध पूत धन धान्य से वंचित रहे न कोय ।।

Wednesday, December 22, 2021

मन से सोचे हुए कार्य को वाणी से न बताए

मनसा चिन्तितंकार्यं 
      वचसा न प्रकाशयेत्।
अन्यलक्षितकार्यस्य 
      यत: सिद्धिर्न जायते॥

*भावार्थः- मन से सोचे हुए कार्य को वाणी से न बताए एवं अपने लक्ष्य के लिए निरंतर अथक प्रयास करते रहें क्योंकि जिस कार्य पर किसी और की दृष्टि लग जाती है, वह सामान्यतः पूर्ण नहीं होता।*

Wednesday, December 15, 2021

सोलह सुखों के बारे में सुना था तो जानिये क्या हैं वो सोलह सुख

*सोलह सुखों के बारे में सुना था तो जानिये क्या हैं वो सोलह सुख*
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1 *पहला सुख निरोगी काया।*
2 *दूजा सुख घर में हो माया।*
3 *तीजा सुख कुलवंती नारी।*
4 *चौथा सुख सुत आज्ञाकारी।*

5 *पाँचवा सुख सदन हो अपना।*
6 *छट्ठा सुख सिर कोई ऋण ना।*
7 *सातवाँ सुख चले व्यापारा।*
8 *आठवाँ सुख हो सबका प्यारा।*

9 *नौवाँ सुख भाई औ' बहन हो ।*
10 *दसवाँ सुख न बैरी स्वजन हो।*
11 *ग्यारहवाँ मित्र हितैषी सच्चा।*
12 *बारहवाँ सुख पड़ौसी अच्छा।*

13 *तेरहवां सुख उत्तम हो शिक्षा।*
14 *चौदहवाँ सुख सद्गुरु से दीक्षा।*
15 *पंद्रहवाँ सुख हो साधु समागम।*
16 *सोलहवां सुख संतोष बसे मन।*

*16 सोलह सुख ये होते भाविक जन।*
*जो पावैं सोइ धन्य हो जीवन।।*

*हालांकि आज के समय में  ये सभी सुख हर किसी को   मिलना मुश्किल हैं  लेकिन इनमे से जितने भी  सुख मिले उससे खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए.*

*जय  श्री राम*

Tuesday, July 20, 2021

दुष्ट व्यक्ति से दूर रहना


हस्ती हस्त सहस्त्रेण 
      शत हस्तेन वाजिनः,
श्रृड्गिणी दश हस्तेन 
       देशत्यागेन दुर्जनः।।

*भावार्थः- हाथी से हजार गज की दूरी रखें, घोड़े से सौ की, सींग वाले जानवर से दस की.... परंतु जहाँ दुष्ट स्वभाव वाले दुर्जन रहते हो, उस स्थान अथवा क्षेत्र को अतिशीघ्र त्याग देना ही उचित है।*

Sunday, June 6, 2021

जैसी संगति वैसी रंगती

 सत्रिविशते यादृशांश्चोपसेवते। 
यादृगिच्छेच्च भवितुं तादृग् भवति पूरुषः ॥

*भावार्थ : व्यक्ति जैसे लोगों के साथ उठता -बैठता है, जैसे लोगों की संगति करता है, उसी के अनुरूप स्वयं को ढाल लेता है।*

Saturday, April 3, 2021

अइसन सुंदर देहिया बार-बार ना मिली

अइसन सुंदर देहिया बार-बार ना मिली। 
बिना भजन के नैया भव से पार ना चली।।
जिंदगी के आस नइखे , कई ल भजनिया।
माया के बाजार में एक दिन छुटी जाई दुनिया।।
राम नाम के दिया, बारा अपने दिया।
कबहूँ जीवन पथ में तोहके अंधियारा ना मिली।
बिना भजन के नैया भव से पार ना चली।।