प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥
सरल अर्थ
- प्रातकाल
उठि
कै
रघुनाथा
— भगवान श्रीराम प्रातःकाल उठते थे।
- मातु पिता गुरु नावहिं माथा — वे माता, पिता और गुरु को सिर झुकाकर प्रणाम करते थे।
सोइ सेवक प्रियतम मम सोई। मम अनुसासन मानै जोई॥
सरल अर्थ (हिंदी)
- सोइ सेवक प्रियतम मम सोई — वही सेवक मुझे सबसे प्रिय है।
- मम अनुसासन मानै जोई — जो मेरे आदेश और धर्मसम्मत अनुशासन का पालन करता है।
आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा॥
सरल अर्थ
भगवान
श्रीराम अपने माता-पिता
और गुरु से आज्ञा लेकर
ही नगर के कार्य
या अपने दैनिक कर्तव्य
करते थे। उनके इस
विनम्र, अनुशासित और आदर्श आचरण
को देखकर राजा दशरथ
का
हृदय
अत्यंत
प्रसन्न
हो
जाता
था।
सुनहु बिभीषण प्रभु कै रीती।
करहिं सदा सेवक पर प्रीती॥
सरल अर्थ
“हे विभीषण! सुनो, प्रभु श्रीराम की रीति ऐसी है कि वे अपने सेवकों से सदा प्रेम करते हैं।”
अर्थात्
जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान श्रीराम की सेवा और भक्ति करता है, श्रीराम उस पर हमेशा प्रेम और कृपा रखते हैं।
भाव: भगवान के लिए व्यक्ति का पद या बड़ा-छोटा होना महत्वपूर्ण नहीं है; सच्ची भक्ति और समर्पण ही सबसे महत्वपूर्ण है।