Thursday, February 25, 2021

इच्छापूर्ति वृक्ष

एक घने जंगल में एक *इच्छापूर्ति वृक्ष* था, उसके नीचे बैठ कर कोई भी *इच्छा* करने से वह *तुरंत पूरी* हो जाती थी।
                यह बात बहुत कम लोग जानते थे..क्योंकि उस घने जंगल में जाने की कोई *हिम्मत ही नहीं* करता था।
                  एक बार संयोग से एक थका हुआ *व्यापारी* उस वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी नींद लग गई। 
                 *जागते ही* उसे बहुत *भूख लगी* ,उसने आस पास देखकर सोचा- ' काश *कुछ खाने को मिल जाए !*' तत्काल स्वादिष्ट *पकवानों से भरी थाली* हवा में तैरती हुई उसके सामने आ गई।
                   व्यापारी ने *भरपेट खाना* खाया और भूख शांत होने के बाद सोचने लगा..
                *काश कुछ पीने को मिल जाए..*' तत्काल उसके सामने हवा में तैरते हुए अनेक *शरबत* आ गए।
                  *शरबत* पीने के बाद वह आराम से बैठ कर सोचने लगा-   ' *कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ।*
            हवा में से खाना पानी प्रकट होते पहले कभी नहीं देखा न ही सुना..जरूर इस *पेड़ पर कोई भूत* रहता है जो मुझे खिला पिला कर बाद में *मुझे खा लेगा*  ऐसा सोचते ही तत्काल उसके सामने एक *भूत आया और उसे खा गया।*
              इस प्रसंग से आप यह सीख सकते है कि *हमारा मस्तिष्क ही इच्छापूर्ति वृक्ष है आप जिस चीज की प्रबल कामना करेंगे  वह आपको अवश्य मिलेगी।*
               अधिकांश लोगों को जीवन में बुरी चीजें इसलिए मिलतीहैं.....
क्योंकि वे *बुरी चीजों की ही कामना* करते हैं।
                   इंसान ज्यादातर समय सोचता है-कहीं बारिश में भीगने से मै *बीमार न हों जाँऊ* ..और वह *बीमार हो जाता हैं*..!
              
                इंसान सोचता है - मेरी *किस्मत ही खराब* है .. और उसकी *किस्मत सचमुच खराब* हो जाती हैं ..!
       
              इस तरह आप देखेंगे कि आपका *अवचेतन मन( subconscious mind)* इच्छापूर्ति वृक्ष की तरह आपकी *इच्छाओं को ईमानदारी से पूर्ण* करता है..!
                इसलिए आपको अपने मस्तिष्क में *विचारों को सावधानी से प्रवेश* करने की *अनुमति देनी चाहिए।*
               यदि *गलत विचार* अंदर आ जाएगे तो *गलत परिणाम* मिलेंगे। *विचारों पर काबू* रखना ही अपने *जीवन पर काबू* करने का रहस्य है..!
            आपके *विचारों से ही* आपका  *जीवन* या तो.. 
*स्वर्ग* बनता है या *नरक*..उनकी बदौलत ही आपका *जीवन सुखमय या दुख:मय* बनता है..
              *विचार जादूगर* की तरह होते है , जिन्हें *बदलकर* आप अपना *जीवन बदल* सकते है..!
           इसलिये सदा *सकारात्मक सोच* रखें ..   

🙏🏻आपका दिन उन्नति कारक हो🙏🏻

Monday, February 8, 2021

मेरा अनुभव

(1) जो समझता नही उसको समझाने में अपना समय और दिमाग दोनो मत खराब करो
प्रदीप तिवारी

(२) बात करने से बात बनती है। 
नारायण गदरे

(३) काम करो न करो काम की चर्चा जरूर करो 
अमर कुमार पांडा

(४) किसी भी मेल का जवाब तुरंत मत दो 4 घंटे के बाद दो और 2 - 3 बार खुद देखो फिर भेजो।
रवि कुमार नायर

5) रिस्क न लेना भी एक रिस्क है। 
घनश्याम पांडेय

6) पुराने कांटेक्ट कभी खत्म नही करने चाहिए।
घनश्याम पांडेय

7) आपको उनके सवालो में नहीं फ़सना है , आपको उनको वो बताना है जहा आप कम्फर्टेबले हो।  (Ravi Nair)

Tuesday, December 15, 2020

भैस चालीसा

महामूर्ख दरबार में,
लगा अनोखा केस
फँसा हुआ है मामला, ...
अक्ल बङी या भैंस,
अक्ल बङी या भैंस,
दलीलें बहुत सी आयीं
महामूर्ख दरबार की
अब,देखो सुनवाई...

मंगल भवन अमंगल हारी-
भैंस सदा ही अकल पे भारी
भैंस मेरी जब चर आये चारा
पाँच सेर हम दूध निकारा
कोई अकल ना यह कर पावे
चारा खा कर दूध बनावे
अक्ल घास जब चरने जाये
हार जाय नर अति दुख पाये
भैंस का चारा
लालू खायो
निज घरवारि
सी.एम. बनवायो
तुमहू भैंस का चारा खाओ
बीवी को सी.एम. बनवाओ
मोटी अकल मन्दमति होई
मोटी भैंस दूध अति होई
अकल इश्क़ कर कर के रोये
भैंस का कोई बाँयफ्रेन्ड ना होये
अकल तो ले मोबाइल घूमे
एस.एम.एस. पा पा के झूमे
भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे
कबहूँ मिस्ड काल ना मारे
भैंस कभी सिगरेट ना पीती
भैंस बिना दारू के जीती
भैंस कभी ना पान चबाये
ना ही इसको ड्रग्स सुहाये
शक्तिशालिनी शाकाहारी
भैंस हमारी कितनी प्यारी
अकलमन्द को कोई ना जाने
भैंस को सारा जग पहचाने
जाकी अकल मे गोबर होये
सो इन्सान पटक सर रोये
मंगल भवन अमंगल हारी

भैंस का गोबर अकल पे भारी
भैंस मरे तो बनते जूते
अकल मरे तो पङते जूते॥

Thursday, November 26, 2020

संत ने छोड़ें संतई चाहे जितने मिलें असंत ,चमचे न छोड़ें चमचई चाहे जूते मिलें अनंत

संत ने छोड़ें संतई चाहे जितने मिलें असंत ,चमचे न छोड़ें चमचई चाहे जूते मिलें अनंत

Sunday, October 4, 2020

Happy birthday श्लोक

सुदिनं सुदिनं तव जन्मदिनम् |  भवतु मंगलं तव जन्म दिनम् ll
चिरंजीव कुरु कीर्ति वर्धनम् l  चिरंजिव कुरु यशोवर्धनम् ll
विजयीभव सर्वत्र सर्वदा l  जगति भवतु तव यशोगानम् ll
“जीवेत शरद: शतं दीर्धायुरारोग्यामस्तु

Monday, September 7, 2020

चांदनी रात में बरसात हुई लगती है

चांदनी रात में बरसात हुई लगती है
जब दर्द हो सीने में हर बात बुरी लगती है

Thursday, September 3, 2020

दुश्मनो को हराने के लिए मंत्र

ॐ ह्रीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिव्हाम कीलय - कीलय बुद्धिम विनाशाय  ह्री ॐ नमः