सत्य है साधना में कमी रह गई . कैसे कह दूं की प्रभु की कृपा में कमी .....
Friday, July 20, 2012
Friday, October 21, 2011
Monday, July 4, 2011
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने, राम रतन धन पायो ॥
वस्तु अमोलिक, दी मेरे सतगुरु, किरपा करि अपनायो ।
जनम जनम की पूंजी पाई, जग में सभी खोवायो ।
खरचै न खूटै, जाको चोर न लूटै, दिन दिन बढ़त सवायो ।
सत की नाव, खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो ।
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर, हरष हरष जस गायो ।
वस्तु अमोलिक, दी मेरे सतगुरु, किरपा करि अपनायो ।
जनम जनम की पूंजी पाई, जग में सभी खोवायो ।
खरचै न खूटै, जाको चोर न लूटै, दिन दिन बढ़त सवायो ।
सत की नाव, खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो ।
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर, हरष हरष जस गायो ।
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
जो सुख पाऊँ राम भजन में
सो सुख नाहिं अमीरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
भला बुरा सब का सुन लीजै
कर गुजरान गरीबी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
आखिर यह तन छार मिलेगा
कहाँ फिरत मग़रूरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
प्रेम नगर में रहनी हमारी
साहिब मिले सबूरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
कहत कबीर सुनो भयी साधो
साहिब मिले सबूरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
जो सुख पाऊँ राम भजन में
सो सुख नाहिं अमीरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
भला बुरा सब का सुन लीजै
कर गुजरान गरीबी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
आखिर यह तन छार मिलेगा
कहाँ फिरत मग़रूरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
प्रेम नगर में रहनी हमारी
साहिब मिले सबूरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
कहत कबीर सुनो भयी साधो
साहिब मिले सबूरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में ॥
Monday, June 27, 2011
दोस्तों के साथ पुणे में
कल्पेश, अखिलेश्वर, चेतन, विजय,
Kaho usi se jo na kahe kisi se!
Maango usi se jo dede khushi se !
Chaho use jo tumhe mile kismat se !
Dosti karo usi se jo hamesha nibhaye hasi se॥
..............................अखिलेश्वर दुबे
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