Saturday, May 21, 2011
जीवन कि कुछ बातें
मै जिन्दगी के उस पड़ाव पर आ गया हूँ जहा आकर हर आदमी कि जिन्दगी फिर से शुरू हो जाती है मतलब कहने का ये है कि मेरी शादी २२ फेब्रुअरी २०११ को सेमरहा गाँव कि एक लड़की पूजा से हो गया वो दिखने में बहुत ही अच्छी है गोरी भी है और वो दूसरो को रेस्पेक्ट भी देती है परिवार में सभी उससे बहुत खुश है । और हाँ दोस्तों मै एक कंस्ट्रक्सन कंपनी में काम करता हूँ स्टोर इंचार्ज के पद पर सैलरी भी अच्छी है । मेरे घर में मेरे पापा, मम्मी, भाई, बहिन, है और मेरे गाँव में २ चाचा चची और उनके बच्चें है परिवार में मै अपनी पीढी में सबसे बड़ा हूँ इसलिए सब लो इज्ज़त भी करते है । मेरे पिताजी आई आई टी बॉम्बे में काम करते है मेरा भाई इलेक्ट्रानिक इंजिनियर है ।
कुछ पल जिन्दगी के
Tuesday, May 17, 2011
Monday, May 16, 2011
हो लाल मेरी पत रखियो
हो हो हो
हो लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालण
ओ लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालण
सिंदड़ी दा सेवण दा
सखी शाह बाज़ कलन्दर
दमादम मस्त कलन्दर
अली दम दम दे अन्दर
दमादम मस्त कलन्दर
अली दा पैला न.म्बर
हो लाल मेरी -२
चार चराग़ तेरे बरण हमेशा -३
पंजवा मैं बारण आई बला झूले लालण
हो पंजवा मैं
पंजवा मैं बारण आई बला झूले लालण
सिंदड़ी दा सेवण दा
सखी शाह बाज़ कलन्दर
दमादम मस्त कलन्दर
अली दम दम दे अन्दर
दमादम मस्त कलन्दर
अली दा पैला न.म्बर
हो लाल मेरी -२
हिंद सिंद पीरा तेरी नौबत बाजे -३
नाल बजे घड़ियाल बला झूले लालण
हो नाल बजे
नाल बजे घड़ियाल बला झूले लालण
सिंदड़ी दा सेवण दा
सखी शाह बाज़ कलन्दर
दमादम मस्त कलन्दर
अली दम दम दे अन्दर
दमादम मस्त कलन्दर
अली दा पैला न.म्बर
हो लाल मेरी -२
ओ हो
हर दम पीरा तेरी ख़ैर होवे -३
नाम-ए-अली बेड़ा पार लगा झूले लालण
हो नाम-ए-अली
नाम-ए-अली बेड़ा पार लगा झूले लालण
सिंदड़ी दा सेवण दा
सखी शाह बाज़ कलन्दर
दमादम मस्त कलन्दर
अली दम दम दे अन्दर
दमादम मस्त कलन्दर
अली दा पैला न.म्बर
हो लाल मेरी -२
हो लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालण
सिंदड़ी दा सेवण दा
सखी शाह बाज़ कलन्दर
दमादम मस्त कलन्दर
अली दम दम दे अन्दर
दमादम मस्त कलन्दर
अली दा पैला न.म्बर
Thursday, March 24, 2011
भैंस चालीसा (Bhains Chalisa)
महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस
फसा हुआ है मामला, अक्ल बङी या भैंस
अक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयीं
महामूर्ख दरबार की अब,देखो सुनवाई
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारी
भैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकारा
कोई अकल ना यह कर पावे- चारा खा कर दूध बनावे
अक्ल घास जब चरने जाये- हार जाय नर अति दुख पाये
भैंस का चारा लालू खायो- निज घरवारि सी.एम. बनवायो
तुमहू भैंस का चारा खाओ- बीवी को सी.एम. बनवाओ
मोटी अकल मन्दमति होई- मोटी भैंस दूध अति होई
अकल इश्क़ कर कर के रोये- भैंस का कोई बाँयफ्रेन्ड ना होये
अकल तो ले मोबाइल घूमे- एस.एम.एस. पा पा के झूमे
भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे- कबहूँ मिस्ड काल ना मारे
भैंस कभी सिगरेट ना पीती- भैंस बिना दारू के जीती
भैंस कभी ना पान चबाये - ना ही इसको ड्रग्स सुहाये
शक्तिशालिनी शाकाहारी- भैंस हमारी कितनी प्यारी
अकलमन्द को कोई ना जाने- भैंस को सारा जग पहचाने
जाकी अकल मे गोबर होये- सो इन्सान पटक सर रोये
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस का गोबर अकल पे भारी
भैंस मरे तो बनते जूते- अकल मरे तो पङते जूते
गुलशन की फक़त फूलों से नहीं काटों से भी ज़ीनत होती है
ऐ वाइज़-ए-नादां करता है तू एक क़यामत का चर्चा,यहाँ रोज़ निगाहें मिलती हैं यहाँ रोज़ क़यामत होती है.
वो पुर्शिश-ए-गम को आए हैं कुछ कह ना सकूँ चुप रह ना सकूँ,खामोश रहूं तो मुश्किल है कह दूं तो शिकायत होती है.
करना ही पड़ेगा ज़ब्त-ए-अलम पीने ही पड़ेंगे ये आँसू,फरियाद-ओ-फूग़ान से ऐ नादां तौहीन-ए-मोहब्बत होती है.
जो आके रुके दामन पे ‘सबा’ वो अश्क़ नहीं है पानी है,जो अश्क़ ना छल्के आँखों से उस अश्क़ की कीमत होती है.
खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में
जाना किसका ज़िक्र है इस अफ़साने मेंदर्द मज़े लेता है जो दुहराने में
शाम के साये बालिस्तों से नापे हैंचाँद ने कितनी देर लगा दी आने में
रात गुज़रते शायद थोड़ा वक्त लगेज़रा सी धूप दे उन्हें मेरे पैमाने में
दिल पर दस्तक देने ये कौन आया हैकिसकी आहट सुनता है वीराने मे ।