Sunday, April 5, 2026

प्रवचन के लिए श्लोक

" *सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं* ।
*जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं*॥"

🙏 *अर्थ (सरल हिंदी में* ):

जब कोई जीव (मनुष्य) सच्चे मन से भगवान के सामने (उनकी शरण में) आता है,
तो उसके करोड़ों जन्मों के पाप उसी क्षण नष्ट हो जाते हैं।

No comments:

Post a Comment